जानिए कैसे तय होती है रुपए की कीमत, रुपया और डॉलर का पूरा गणित

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आज कल रुपए के गिरते भाव के कारण काफी हो हल्ला मचा हुआ है। भारतीया मुद्रा यानी रुपया का मूल्य डॉलर के मुकाबले काफी कम हो चुका है। पर क्या आप जानते हैं कि क्या है वो वजह जिसकी वजह से रुपया का मूल्य प्रभावित होता है और कैसे आप देशहित में रुपए को मजबूत करने में अपना योगदान दे सकते हैं। चलिए हम आपको बताते हैं ये सारा गणित। वो भी बिलकुल आसान भाषा में।

बड़ा ही सीधी सी थियरी है। भारत के पास जितना कम डॉलर होगा, डॉलर का मूल्य उतना बढ़ेगा। भारत या कोई भी देश अपने ज़रूरत की वस्तुए या तो खुद बनाते हैं या उन्हें विदेशों से आयात करते हैं और विदेशो से कुछ भी आयात करने के लिए आपको उन्हें डॉलर में चुकाना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी देश से आप तेल का आयात करना चाहते हैं तो उसका भुगतान आप रुपए में नही कर सकते। उसके लिए आपको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य किसी मुद्रा का प्रयोग करना होगा। तो इसका मतलब ये है कि भारत को भुगतान डॉलर या यूरो में करना होगा।
अब सवाल ये उठता है कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारी करने के लिए हम डॉलर कहां से लायें। अपने देश में डॉलर या विदेशी मुद्रा विभिन्न माध्यमों से आती है।

1. निर्यात बढ़ाया जाए जिससे की विदेशी मुद्रा की प्राप्ति हो। उत्पादन बढ़ाए जाएं जिससे की अधिक से अधिक निर्यात हो सके।
2. स्वदेशी अपनाओ- विदेशो में बनने वाली 80 पैसे की ड्रिंक यहां 15 से 20 रुपए में बेचा जाती है। यदि हम स्वदेशी वस्तुओं या प्रयोग करना शुरू कर दें तो इन विदेशी वस्तुओं को आयात करने का खर्च बच जाएगा।
3. तेल का विकल्प- हम बड़ी मात्रा में तेल का आयात करने पर मजबूर हैं क्योंकि देश में तेल का उत्पादन मांग के अनुसार नही है। यदि हम तेल पर आश्रित अपनी अर्थव्यवस्था को बदलने की कोशिश करें तो विदेशी भंडार एक बहुत बड़ा हिस्सा हम बचा सकते हैं और इसके लिए हमें तेल के विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
4. भारतीयो का स्वर्ण प्रेम…सोने से लगाव काफी पुराना है। विवाह या पर्व त्योहारो पर सोने की मांग में अत्प्रश्चित वृद्धि देखी जाती है जिससे हमारा आयात बिल बढ़ता है।
मोटे तौर पे रुपए को मजबूती देने के लिए हूमें विदेशो से निवेश बढ़ाना होगा। विदेशी निवेशको के लिए अनुकूल माहौल का निर्माण करना होगा। इसके अलावा स्वदेशी अपनाना होगा। जिन चीजों को हम देश में बना सकते हैं उनका आयात बंद करना होगा। हर भारतीय को ईमानदारी के साथ भारत का विकास में योगदान देना होगा। उत्पादन जितना बढ़ेगा, निर्यात उतना अधिक होगा, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

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